वीरपुर (बेगूसराय)। बिहार के बेगूसराय जिले के वीरपुर प्रखंड की पर्रा पंचायत में पर्रा-सरौंजा सड़क की बदहाली को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। लंबे समय से सड़क की खराब स्थिति से परेशान ग्रामीणों ने शनिवार को विरोध जताने का अनोखा तरीका अपनाया। सड़क निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने सड़क पर बने बड़े-बड़े गड्ढों का नामकरण ही जनप्रतिनिधियों के नाम पर कर दिया। किसी गड्ढे को विधायक कुंदन कुमार कुंड का नाम दिया गया, तो किसी को सांसद गिरिराज सिंह कुंड और किसी को पथ निर्माण मंत्री शैलेंद्र कुमार कुंड के नाम से पुकारा गया।
ग्रामीणों का यह व्यंग्यात्मक प्रदर्शन क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। इसके जरिए उन्होंने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग का ध्यान सड़क की बदहाल स्थिति की ओर खींचने की कोशिश की। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क की मरम्मत और निर्माण की मांग को लेकर ग्रामीणों ने इस बार पारंपरिक तरीके से विरोध करने के बजाय गड्ढों का नामकरण कर अपना संदेश पहुंचाने का प्रयास किया।
गड्ढों को दिया जनप्रतिनिधियों का नाम
शनिवार को पर्रा-सरौंजा सड़क पर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन के दौरान अलग-अलग गड्ढों को जनप्रतिनिधियों के नाम से जोड़ दिया। सड़क पर बने गड्ढों को विधायक, सांसद और पथ निर्माण मंत्री के नाम पर नामित करना ग्रामीणों के विरोध का मुख्य आकर्षण रहा।
ग्रामीणों ने किसी गड्ढे का नाम विधायक कुंदन कुमार कुंड रखा, तो किसी को सांसद गिरिराज सिंह कुंड का नाम दिया। वहीं, एक अन्य गड्ढे को पथ निर्माण मंत्री शैलेंद्र कुमार कुंड के नाम से पुकारा गया। इस तरह ग्रामीणों ने सड़क की बदहाली को लेकर अपनी नाराजगी व्यंग्य के माध्यम से जाहिर की।
इस विरोध प्रदर्शन का मकसद संबंधित जनप्रतिनिधियों और विभाग तक यह संदेश पहुंचाना था कि सड़क की स्थिति अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है। ग्रामीणों ने गड्ढों के नामकरण के जरिए यह सवाल उठाया कि जब सड़क की हालत इतनी खराब है, तो उसकी मरम्मत और निर्माण की दिशा में जरूरी कदम कब उठाए जाएंगे।
बदहाल सड़क से परेशान हैं ग्रामीण
पर्रा पंचायत की पर्रा-सरौंजा सड़क स्थानीय लोगों के आवागमन का महत्वपूर्ण मार्ग है। सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे होने के कारण लोगों को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क की खराब स्थिति को लेकर उनकी परेशानी लगातार बनी हुई है।
सड़क पर बने गड्ढों के कारण वाहन चालकों को आवाजाही के दौरान सावधानी बरतनी पड़ती है। खासकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए ऐसी सड़क पर सफर करना मुश्किल हो सकता है। ग्रामीणों को रोजमर्रा के कामों के लिए इसी मार्ग से गुजरना पड़ता है। ऐसे में सड़क की खराब स्थिति का असर स्थानीय आवागमन पर पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की स्थिति में सुधार होना जरूरी है। उनका विरोध प्रदर्शन इसी मांग को सामने लाने का प्रयास है। उनका मानना है कि जब तक सड़क की समस्या का समाधान नहीं होगा, तब तक लोगों को इसी तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
व्यंग्य के जरिए जनप्रतिनिधियों तक पहुंचाया संदेश
आमतौर पर सड़क निर्माण या मरम्मत की मांग को लेकर लोग धरना-प्रदर्शन, नारेबाजी और ज्ञापन जैसे तरीके अपनाते हैं। लेकिन पर्रा पंचायत के ग्रामीणों ने इस बार विरोध का अलग तरीका चुना। उन्होंने सड़क के गड्ढों को जनप्रतिनिधियों के नाम देकर व्यवस्था पर व्यंग्य किया।
इस प्रदर्शन के जरिए ग्रामीणों ने विधायक, सांसद और पथ निर्माण मंत्री का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की। गड्ढों को उनके नाम से जोड़ना प्रतीकात्मक विरोध का तरीका था, जिसके माध्यम से ग्रामीण सड़क की वास्तविक स्थिति को सामने रखना चाहते थे।
ग्रामीणों के इस कदम ने सड़क की समस्या को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। उनका कहना है कि सड़क की बदहाली को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए और इस दिशा में ठोस कार्रवाई होनी चाहिए।
सड़क निर्माण की मांग पर अड़े ग्रामीण
ग्रामीणों की मुख्य मांग पर्रा-सरौंजा सड़क का निर्माण और उसकी बदहाल स्थिति से निजात दिलाना है। उनका कहना है कि सड़क पर बने गड्ढों के कारण लोगों को परेशानी हो रही है। इसलिए संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधियों को इस समस्या पर ध्यान देना चाहिए।
शनिवार को किए गए इस अनोखे प्रदर्शन के बाद अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संबंधित विभाग की ओर से सड़क की स्थिति सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं। फिलहाल ग्रामीणों ने अपने प्रतीकात्मक विरोध के माध्यम से अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है।
पर्रा-सरौंजा सड़क के गड्ढों का विधायक, सांसद और मंत्री के नाम पर नामकरण करना ग्रामीणों के विरोध का अनोखा तरीका रहा। इस प्रदर्शन के जरिए उन्होंने साफ संदेश देने की कोशिश की कि सड़क की बदहाली अब उनके लिए रोजमर्रा की बड़ी समस्या बन चुकी है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनका यह विरोध संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगा और सड़क निर्माण की मांग पर जल्द ध्यान दिया जाएगा।



