लखनऊ: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया के महासचिव डॉ. मोइन खान ने कहा है कि जो लोग मुसलमानों की पहचान उनके कपड़ों और बाहरी रूप से करने की कोशिश करते रहे हैं, उन्हें बदलते हालात और मुसलमानों की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता को भी समझना होगा। एक समय कहा गया था कि उपद्रवियों की पहचान उनके कपड़ों से की जा सकती है, लेकिन अब मुसलमान भी अपने राजनीतिक फैसलों के जरिए जवाब देना जानते हैं।
उन्होंने कहा कि वैश्विक दबाव के बावजूद ईरान का अपने राष्ट्रीय हितों पर कायम रहना और अफगानिस्तान का लंबा अनुभव यह साबित करता है कि किसी देश को केवल ताकत के बल पर अपनी इच्छा के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। वैश्विक हो या भारतीय राजनीति, मुसलमानों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
डॉ. मोइन खान ने कहा कि भारत को तबाही और बदहाली की ओर बढ़ता हुआ देश बताने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हों या टैरिफ के जरिए दबाव बनाने वाली ताकतें, भारत अपने राष्ट्रीय हितों के मामले में किसी दबाव के आगे नहीं झुक सकता। उन्होंने कहा कि धर्म और धार्मिक पहचान की राजनीति करने वालों को भी विदेशों में जाकर अपने बयानों और लहजे में बदलाव करना पड़ता है। यह बदलते राजनीतिक हालात का संकेत है।
उन्होंने वैश्विक ताकतों के दोहरे रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि बर्मा में मुसलमानों पर हुए अत्याचार और नाइजीरिया व सूडान में लंबे समय से जारी मानवीय संकट के दौरान पीड़ितों की रक्षा के लिए क्या व्यावहारिक कदम उठाए गए? केवल ईरान, इराक और कुछ खास देशों के मामलों में मानवाधिकारों की बात करना और दूसरे स्थानों पर चुप रहना वैश्विक राजनीति के दोहरे मापदंड को दिखाता है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव ने कहा कि भारतीय मुसलमानों को धर्म, कपड़ों और बाहरी पहचान के आधार पर अलग-अलग खांचों में देखने का रवैया अब स्वीकार्य नहीं है। मुसलमान देश के इतिहास, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और लोकतांत्रिक व्यवस्था के बराबर के भागीदार हैं। उनकी नागरिकता किसी सरकार या राजनीतिक दल की देन नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है।
उन्होंने कहा कि मुसलमानों के अधिकार, धार्मिक स्वतंत्रता, समानता और सुरक्षा को केवल राजनीतिक नारों तक सीमित रखने की कोशिश का जवाब लोकतांत्रिक तरीके से दिया जाएगा। भारतीय मुसलमान किसी के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन अपने अधिकारों की अनदेखी भी स्वीकार नहीं करेंगे। वे अपने वोट और राजनीतिक फैसलों के जरिए स्पष्ट करेंगे कि उनकी पहचान कपड़ों से नहीं, बल्कि उनके संवैधानिक अधिकारों और नागरिक हैसियत से हो। जो राजनीतिक ताकतें समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक संरक्षण की अनदेखी करेंगी, जनता उन्हें अपने लोकतांत्रिक फैसले से जवाब देगी।



