लखनऊ: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) परिसर स्थित लगभग 700 वर्ष पुराने ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक केंद्र दरगाह हजरत हाजी अलहरमैन शाह की भूमि के उपयोग को लेकर जारी विवाद पर ऑल इंडिया मोहम्मदी मिशन ने चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग की है।
मिशन के महासचिव सय्यद बाबर अशरफ किछौछवी ने कहा कि यह दरगाह लंबे समय से श्रद्धालुओं और जायरीन की आस्था का केंद्र रही है तथा सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक विरासत की महत्वपूर्ण पहचान है।
उन्होंने बताया कि मुहर्रम के अवसर पर मखदूम शाह मीना फाउंडेशन के तत्वावधान में दरगाह पर “ज़िक्र-ए-शहादत-ए-इमाम हुसैन ” कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायालय में केजीएमयू की ओर से संबंधित स्थान पर पार्किंग न होने और जायरीन को किसी असुविधा से इनकार किया गया है, जबकि दरगाह से जुड़े लोगों का दावा है कि भूमि का उपयोग पार्किंग के रूप में होने से धार्मिक गतिविधियां और श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
सय्यद बाबर अशरफ ने कहा कि विभिन्न पक्षों के विरोधाभासी दावों को देखते हुए मामले की स्वतंत्र जांच आवश्यक है ताकि तथ्य स्पष्ट हो सकें। उन्होंने ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों की कानूनी स्थिति, गरिमा और पारंपरिक गतिविधियों के संरक्षण की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
मिशन ने मांग की कि मुहर्रम के दौरान धार्मिक कार्यक्रमों में कोई बाधा न आए और जायरीन के लिए आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जाएं।



