लखनऊ: मक्तब जीती खेड़ा, मोहनलालगंज, जो मकातिब शाखा, दावतो इरशाद, नदवतुल उलेमा, लखनऊ की निगरानी में संचालित है, में जलसा-ए-सीरतुन्नबी का आयोजन किया गया। जलसे का आगाज हाफिज शफीक की तिलावत-ए-कुरआन से हुआ। इसके बाद हाफिज शकील, इमाम व खतीब मस्जिद जीती खेड़ा ने बारगाह-ए-रिसालत में नात-ए-पाक पेश की।
नात के बाद मौलाना बिलाल अहमद कासमी, इमाम भटगांव ने अपने संबोधन में इस्लाम की बुनियादी बातों का जिक्र करते हुए कहा कि हर मुस्लिम बच्चे के लिए दीन की बुनियादी बातों की जानकारी हासिल करना जरूरी है।
इसके बाद मुफ्ती अब्दुल अहद कासमी ने कहा कि लोगों के लिए अल्लाह के रसूल की सीरत को अपना आदर्श बनाकर जिंदगी गुजारना समय की अहम जरूरत है।
मौलाना आसिफ अनवर नदवी ने अपने संबोधन में महिलाओं के स्थान और महत्व का जिक्र करते हुए कहा कि समाज की इस्लाह में महिलाओं की अहम भूमिका होती है। अगर एक महिला दीन की शिक्षा हासिल कर ले तो उसके जरिए पूरे परिवार की इस्लाह हो सकती है। इसलिए महिलाओं को भी समाज की इस्लाह की कोशिश करनी चाहिए और अपने छोटे बच्चों की शिक्षा व तरबियत पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि बच्चे बड़े होकर माता-पिता की सेवा का सहारा बन सकें।
जलसे में क्षेत्र के कई उलेमा-ए-कराम ने बड़ी संख्या में शिरकत की। मौलाना इस्माइल ने निजामत के फराइज अंजाम दिए। इस मौके पर विशेष रूप से मौलाना रिजवान नदवी, इमाम परसैनी, मौलाना निसार अहमद नदवी, इमाम ओगरापुर आदि मौजूद रहे। आखिर में हाफिज शकील ने सभी मेहमानों और प्रतिभागियों का शुक्रिया अदा किया।



