लखनऊ । समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चौधरी के निधन पर शनिवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया सभागार में शोकसभा आयोजित की गई। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने रामगोविन्द चौधरी के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर शोक प्रस्ताव रखा गया। उपस्थित नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की।अखिलेश यादव ने कहा कि अब हमारे बीच महान समाजवादी प्रकाश-स्तंभ रामगोविन्द चौधरी नहीं रहे। उन्होंने जयप्रकाश नारायण और पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की अगुवाई में समाजवादी मूल्यों, सिद्धांतों और लक्ष्यों की मशाल सदैव प्रज्ज्वलित रखी। बलिया की क्रांतिकारी धरती से छात्र राजनीति के कठिन मार्ग से होते हुए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तक पहुंचे रामगोविन्द चौधरी की आवाज और उनके अकाट्य तर्कों का सदैव सम्मान हुआ। सामाजिक न्याय के पुरोधा के रूप में वह जीवनभर संघर्षरत रहे और उन्होंने जनपक्ष को हमेशा सबसे पहले और ऊपर रखा।अखिलेश यादव ने कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में रामगोविन्द चौधरी ने उस समय भी अपनी आवाज बुलंद रखी, जब सदन में समाजवादी पार्टी के 50 विधायक भी नहीं थे। जब वह बोलते थे तो सदन उन्हें बड़ी शांति और गंभीरता के साथ सुनता था। उनके प्रखर वाचन और सत्यनिष्ठा से सदन भी सीख लेता था। उनकी जमीनी पकड़ और जनता से गहरे जुड़ाव के कारण वह स्वयं में सौहार्दपूर्ण और सकारात्मक सामाजिक राजनीति की एक सक्रिय पाठशाला थे। उन्होंने संवैधानिक, लोकतांत्रिक, समाजवादी और पंथनिरपेक्ष मूल्यों की रक्षा के साथ स्वतंत्रता, समता तथा व्यक्ति की गरिमा और प्रतिष्ठा के लिए निर्भय होकर संघर्ष करने की प्रेरणा दी।उन्होंने कहा कि एक सशक्त समाजवादी नेतृत्व के रूप में समाजवादी पार्टी में रामगोविन्द चौधरी की भूमिका सदैव दिग्दर्शक की रही। नेताजी मुलायम सिंह यादव और उनका साथ समाजवादी संकल्पों की पूर्ति के संघर्षों में सदैव एकजुट रहा। अब हम सबकी जिम्मेदारी है कि अपने उन बड़े लोगों के लक्ष्यों की पूर्ति के लिए संपूर्ण समर्पण और संकल्प के साथ एकजुट होकर आगे बढ़ें, जो अब हमारे बीच सैद्धांतिक प्रेरणा के रूप में विद्यमान हैं। अखिलेश यादव ने रामगोविन्द चौधरी को पुनः भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।



