लखनऊ:मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ऑफ इंडिया ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को देशभर के छात्र-छात्राओं और युवाओं के लंबे, शांतिपूर्ण तथा लोकतांत्रिक संघर्ष की ऐतिहासिक जीत बताया है। बोर्ड ने कहा कि यह केवल एक मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि उन लाखों विद्यार्थियों की सामूहिक आवाज़ की सफलता है, जिन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और निष्पक्षता की मांग को लेकर लगातार संघर्ष किया।
बोर्ड के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. मोइन खान ने जारी बयान में कहा कि नीट (NEET) सहित विभिन्न राष्ट्रीय परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं ने लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को संकट में डाल दिया। इसके बावजूद छात्रों ने लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखा। उन्होंने कहा कि सरकार ने शुरू में छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय उनकी आवाज़ को दबाने का प्रयास किया, लेकिन युवाओं की एकजुटता और दृढ़ संकल्प के आगे अंततः उसे जवाबदेही की दिशा में कदम बढ़ाना पड़ा।
डॉ. मोइन खान ने कहा कि पेपर लीक प्रकरण के कारण अनेक विद्यार्थी मानसिक तनाव का शिकार हुए, कई अभ्यर्थी आयु सीमा पार कर गए और असंख्य परिवारों के सपने बिखर गए। इसके बावजूद सरकार ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय आंदोलनरत छात्रों के प्रति कठोर रवैया अपनाया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक भावना के विपरीत है।
उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब जनदबाव के सामने सरकार को झुकना पड़ा हो। इससे पहले किसान आंदोलन के दौरान भी लंबे संघर्ष के बाद केंद्र सरकार को तीनों कृषि कानून वापस लेने पड़े थे। इतिहास इस बात का साक्षी है कि शांतिपूर्ण, संगठित और लोकतांत्रिक आंदोलनों को बल प्रयोग से लंबे समय तक दबाया नहीं जा सकता।
डॉ. मोइन खान ने आंदोलन के दौरान जंतर-मंतर सहित विभिन्न स्थानों पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई कथित पुलिस कार्रवाई पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ कहीं भी दुर्व्यवहार या अनावश्यक बल प्रयोग हुआ है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल एक मंत्री का इस्तीफा पर्याप्त नहीं है। परीक्षा प्रणाली में व्याप्त खामियों, भ्रष्टाचार और संस्थागत कमियों को दूर करने के लिए व्यापक एवं प्रभावी सुधार किए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी छात्र की मेहनत, प्रतिभा और सपने व्यवस्था की विफलताओं की भेंट न चढ़ें।
डॉ. मोइन खान ने देशभर के युवाओं और विद्यार्थियों से अपील की कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की अपनी मुहिम लोकतांत्रिक, संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखें। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य तभी सुरक्षित होगा, जब प्रत्येक छात्र को पारदर्शी, निष्पक्ष और विश्वसनीय शिक्षा एवं परीक्षा व्यवस्था उपलब्ध होगी तथा उसकी मेहनत और योग्यता का पूरा सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा।



