लखनऊ: सफ़र की पहली इतवार के मौके पर नूरबाड़ी इलाके में कदीम जुलूस-ए-18 बनी हाशिम और मजलिस-ए-शबीहे ताबूत अकीदत व एहतराम के साथ आयोजित की गई।
दोपहर 12 बजे आयोजित मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना सैय्यद मुमताज़ जाफ़र ने कर्बला में 18 बनी हाशिम की कुर्बानियों, सब्र और इंसानियत के पैग़ाम पर रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि कर्बला का वाक़िया हर दौर में इंसाफ़, हक़ और इंसानियत की राह दिखाता है।
मजलिस के बाद मस्जिद ख़ैरुन्निसा, नूरबाड़ी से कर्बला दियानत-उद-दौला बहादुर तक कदीम जुलूस-ए-18 बनी हाशिम बरामद हुआ। जुलूस अपने तयशुदा मार्गों से गुज़रते हुए शांतिपूर्ण ढंग से अपने मुकाम तक पहुँचा, जिसमें बड़ी संख्या में अज़ादारों ने शिरकत कर अहलेबैत (अ.स.) को ख़िराज-ए-अक़ीदत पेश किया।



