Sunday, March 1, 2026
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हज़रत ख़दीजा (स) की कुर्बानियाँ  न क़ाबिले फरामोश : हुज्जतुल इस्लाम मौलाना अली अब्बास ख़ान

लखनऊ दीन और हम” क्लासेज़ में पिछली रात, हज़रत ख़दीजा (स) की शहादत की तारीख़  के अवसर पर, उनके गुणों और कष्टों का उल्लेख किया गया। “इमाम ज़माना (अज) और हम” क्लास में उनके जीवन पर प्रकाश डालते हुए मौलाना अली अब्बास ख़ान ने कहा: “बीबी ख़दीजा (स) का इस्लाम की राह में त्याग और समर्पण, उनकी ईमानदारी और उदारता की तरह अद्वितीय है। रसूल-ए अकरम (स) ने उन और हज़रत अबू तालिब (अ) के इंतक़ाल के साल को ‘आम-उल-हुज़्न’ (दुःख का वर्ष) का नाम दिया। वे संसार की चार महान महिलाओं में से एक हैं।”

 

“दीन और हम” क्लासेज़ शहर के विभिन्न स्थानों पर आयोजित की जा रही हैं, जिनमें सभी उम्र के लोग अतिथि के रूप में भाग ले सकते हैं। उल्लेखनीय है कि इन क्लासेज़ का नवा दौर है जो वर्ष 2012 से शुरू हुआ था जिसका उद्देश्य युवाओं को वास्तविक धार्मिक शिक्षा से परिचित कराना और उस पर अमल करने की प्रेरणा देना है।

ये क्लासेज ऐनुल हयात ट्रस्ट की तरफ से आयोजित किये जाते हैं और हैदरी एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी , तंज़ील अकादमी , जमातुज़ ज़हरा , ताहा फाउंडेशन और “दीन और ज़िंदगी” के सहयोग से किये जा रहे हैं | ज्ञात रहे ये क्लासेज का दसवा दौर है जो 2012 में शुरू हुआ था  |

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