लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर भ्रम फैलाने और अपनी राजनीतिक एवं संगठनात्मक कमजोरियों से जनता का ध्यान भटकाने का आरोप लगाया है। भाजपा ने कहा कि कांग्रेस को लगातार मिल रही राजनीतिक चुनौतियों के बीच संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठाने के बजाय अपनी राजनीतिक और संगठनात्मक स्थिति पर आत्ममंथन करना चाहिए। पार्टी ने कहा कि प्रशासनिक और संवैधानिक विषयों को राजनीतिक मुद्दा बनाकर जनता के बीच भ्रम पैदा करने से कांग्रेस की समस्याओं का समाधान नहीं होगा।भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक असफलताओं को छिपाने के लिए बार-बार निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाती रही है। पार्टी ने कहा कि जब भी कांग्रेस चुनावी राजनीति में अपेक्षित परिणाम हासिल नहीं कर पाती, वह निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर आरोप लगाने लगती है। भाजपा ने कांग्रेस से तथ्यों का सम्मान करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से पहले उपलब्ध आधिकारिक जानकारी का अध्ययन करने को कहा।एसआईआर को लेकर चल रहे विवाद के बीच निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की बैठक के बाद स्पष्ट किया था कि एसआईआर सहित संबंधित प्रमुख निर्णय तीनों आयुक्तों की सर्वसम्मति से लिए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि मतदाता सूची में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 से जुड़े बदलावों को उच्चतम न्यायालय के समक्ष रखा गया था और आयोग के अनुसार उन्हें न्यायिक स्वीकृति मिली है।भाजपा ने इसी स्पष्टीकरण का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग के संयुक्त बयान के बाद आयोग के भीतर एसआईआर को लेकर मतभेद होने संबंधी दावों पर स्थिति स्पष्ट हो गई है। हालांकि, इस पूरे विवाद के बीच विभिन्न विपक्षी दल निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और एसआईआर की प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों में निर्वाचन आयुक्तों द्वारा कुछ प्रशासनिक और मतदाता सूची से जुड़े विषयों पर आपत्तियां उठाए जाने का उल्लेख भी हुआ था, जबकि आयोग ने कहा कि इन मुद्दों का अंतिम निर्णयों पर मतभेद के रूप में अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए।भाजपा ने कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र को लेकर सामने आए दावों पर भी कांग्रेस और विपक्ष को घेरा। पार्टी का कहना है कि निर्वाचन आयोग के अनुसार संबंधित पत्र किसी नीतिगत निर्णय अथवा एसआईआर से जुड़ा विषय नहीं था, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के प्रशासनिक कार्य से संबंधित आंतरिक मामला था। भाजपा ने कहा कि इस विषय को एसआईआर से जोड़कर प्रस्तुत करना तथ्यों से परे है।एक अंग्रेजी दैनिक में प्रकाशित रिपोर्ट को लेकर भी भाजपा ने सवाल उठाए और कहा कि रिपोर्ट के आधार पर निर्वाचन आयोग में मतभेद और एसआईआर को लेकर अलग-अलग धारणाएं बनाने की कोशिश की गई। पार्टी ने इसे विपक्ष की राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि आयोग के स्पष्टीकरण के बाद इस मामले में वास्तविक स्थिति सामने आ गई है।फॉर्म-6 को लेकर भाजपा ने कहा कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में नाम शामिल कराने की प्रक्रिया को लेकर विपक्ष द्वारा भ्रम पैदा किया जा रहा है। पार्टी ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में लागू नियमों के तहत फॉर्म-6 की प्रक्रिया जारी है और एसआईआर के संदर्भ में आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। निर्वाचन आयोग ने भी अपने स्पष्टीकरण में मतदाता सूची में पात्र लोगों को शामिल करने की प्रक्रिया तथा बूथ स्तर पर अधिकारियों की भूमिका का उल्लेख किया है।भाजपा ने कहा कि निर्वाचन आयोग पात्र नागरिकों को मताधिकार सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम कर रहा है। पार्टी के अनुसार रैन बसेरों, मजदूरों और बेघर लोगों के लिए विशेष शिविर लगाने तथा छूटे हुए लोगों के घर जाकर बूथ स्तर के अधिकारियों द्वारा प्रपत्र एकत्र करने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।भाजपा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पूर्व बयानों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस और उसके नेता अतीत में भी निर्वाचन प्रक्रिया तथा संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते रहे हैं। वर्ष 2024 में राहुल गांधी ने इलेक्ट्रॉनिक मतदान मशीनों को लेकर ‘ब्लैक बॉक्स’ संबंधी टिप्पणी की थी और एलन मस्क की ईवीएम संबंधी चिंता का समर्थन किया था।राफेल मामले में ‘चौकीदार चोर है’ टिप्पणी को उच्चतम न्यायालय के आदेश से जोड़ने के मामले में राहुल गांधी ने 2019 में अदालत के समक्ष बिना शर्त माफी मांगी थी। उपलब्ध अभिलेखों के अनुसार उन्होंने अदालत के आदेश को उक्त राजनीतिक नारे से जोड़ने को अनजाने में हुई गलती बताया था।भाजपा ने इसके अलावा राहुल गांधी द्वारा न्यायपालिका, निर्वाचन आयोग और अन्य संस्थाओं की कार्यप्रणाली को लेकर दिए गए विभिन्न बयानों का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक मतभेदों को संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जोड़ने से बचना चाहिए। पार्टी ने आरोप लगाया कि चुनावी और राजनीतिक मुद्दों पर असहमति को संस्थागत अविश्वास में बदलने से लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर अनावश्यक भ्रम पैदा होता है।भाजपा ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों से कहा कि वे संवैधानिक संस्थाओं पर आरोप लगाने के बजाय उपलब्ध तथ्यों और आधिकारिक स्पष्टीकरणों के आधार पर अपनी बात रखें। पार्टी ने कांग्रेस नेतृत्व से निर्वाचन आयोग और अन्य संवैधानिक संस्थाओं के संबंध में लगाए गए आरोपों पर पुनर्विचार करने तथा जनता के बीच तथ्यपरक राजनीतिक बहस को प्राथमिकता देने की मांग की।



