Thursday, May 21, 2026
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आरक्षण ही संरक्षक और समानता का आधार’, अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर लगाया पक्षपात का आरोप

लखनऊ । समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि यदि संविधान के प्रावधान लागू करवाने के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़े तो यह समझ लेना चाहिए कि सरकार पक्षपाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जो सरकार पक्षपाती होती है, वह विश्वासघाती भी होती है और पक्षपात स्वयं में अन्याय है, जो लोगों के हक और अधिकारों को छीनता है।बुधवार को समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में अखिलेश यादव ने कहा कि “आरक्षण ही संरक्षक है” और यह समानता स्थापित करने का माध्यम भी है तथा उपकरण भी। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा सरकार को बुलडोजर चलाना ही है तो उसे गैरबराबरी की ऊंची-नीची जमीन को समतल करना चाहिए और वंचित वर्गों को उनके हिस्से का आरक्षण देना चाहिए।अखिलेश यादव ने कहा कि देश के इतिहास में लंबे समय तक सामाजिक विभाजन बना रहा, जिसमें एक ओर वर्चस्ववादी वर्ग और दूसरी ओर वंचित समाज रहा। उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता बी आर आंबेडकर ने सामाजिक भेदभाव और असमानता को समाप्त करने के उद्देश्य से संविधान में आरक्षण की व्यवस्था की थी, जो वर्ष 2014 तक व्यवस्थित रूप से चलती रही। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2014 के बाद आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिशें तेज हुईं और वंचित समाज को हतोत्साहित करने का प्रयास किया गया।सपा प्रमुख ने भाजपा सरकार पर आरक्षण में “खुली डकैती” करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब संविधान की आरक्षण व्यवस्था को सीधे समाप्त नहीं किया जा सकता, तो दूसरे तरीकों से उसे कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों और संस्थानों में “एनएफएस” (नॉट फॉर सूटेबल) का प्रयोग कर आरक्षित वर्गों को अवसरों से वंचित किया जा रहा है तथा लेटरल एंट्री के माध्यम से अपने लोगों को पदों पर स्थापित करने की कोशिश हो रही है।अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा संवैधानिक आरक्षण के साथ “फाउल प्ले” कर रही है और वंचित समाज को आगे बढ़ने के अवसर नहीं देना चाहती। उन्होंने कहा कि आरक्षण सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधित्व को मजबूत करता है तथा लोकतंत्र को बचाने का माध्यम है। उनके अनुसार, आरक्षण के जरिए ही वंचित समाज के साथ लंबे समय से हो रहे अन्याय को समाप्त किया जा सकता है।उन्होंने कहा कि आरक्षण कोई भिक्षा नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार है और इसे नकारना संविधान का तिरस्कार है। उन्होंने कहा कि आरक्षण पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) की आवाज है और सामाजिक समानता स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है।इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष , राष्ट्रीय महासचिव , सांसद , नेता प्रतिपक्ष पूर्व मंत्री राजेंद्र चौधरी और प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल सहित अन्य नेताओं ने भी आरक्षण के मुद्दे पर अपने विचार व्यक्त किए।

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