लखनऊ: मुस्लिम मजलिस के संस्थापक और क़ायदे मिल्लत डॉ. अब्दुल जलील फरीदी की पुण्यतिथि के अवसर पर मुस्लिम मजलिस के पार्टी कार्यालय तकिया पीर जलील, कैसरबाग, लखनऊ में कुरआनख्वानी और “संविधान बचाओ सम्मेलन” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुस्लिम मजलिस उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद नदीम सिद्दीकी ने की।
इस अवसर पर डॉ. अब्दुल जलील फरीदी की धार्मिक, सामाजिक, चिकित्सकीय और राजनीतिक सेवाओं को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि डॉ. अब्दुल जलील फरीदी एक युगद्रष्टा व्यक्तित्व थे, जिन्होंने अपना पूरा जीवन मानव सेवा, समाज के मार्गदर्शन, उर्दू भाषा के संरक्षण और वंचित वर्गों की आवाज़ बुलंद करने के लिए समर्पित कर दिया था। वे न केवल देश के प्रतिष्ठित चिकित्सकों में शामिल थे, बल्कि एक निर्भीक नेता और समर्पित समाजसेवी भी थे।
वक्ताओं ने कहा कि डॉ. फरीदी ने चिकित्सा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सेवाएं प्रदान कीं और हजारों जरूरतमंदों का निःशुल्क उपचार किया। उन्होंने मुसलमानों सहित सभी कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया तथा इसी उद्देश्य से मुस्लिम मजलिस की स्थापना की, ताकि वंचित वर्गों को राजनीतिक जागरूकता और सम्मानजनक प्रतिनिधित्व मिल सके। उनकी राजनीति सत्ता प्राप्ति नहीं, बल्कि जनसेवा पर आधारित थी।
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने वर्तमान परिस्थितियों में देश के संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर देते हुए “संविधान बचाओ कारवां” निकालने का भी निर्णय लिया। वक्ताओं ने कहा कि संविधान की रक्षा और सामाजिक न्याय को मजबूत करने के लिए जन-जागरण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
बैठक में मोहम्मद जुनैद, मोहम्मद इरफान कादरी, डॉ. मोहम्मद अफज़ल, शोऐब बिन हबीब, ज़मीरुद्दीन, मोहम्मद मुअज्जम खान, मोहम्मद आकिफ, अंस जाफरी, सय्यद अतहर और साकिब कुरैशी सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. अब्दुल जलील फरीदी के लिए कुरआनख्वानी और दुआ का आयोजन किया गया।



