Tuesday, May 19, 2026
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उत्तर प्रदेश को 2400 मेगावाट की नई तापीय ऊर्जा परियोजना की सौगात, ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 2400 मेगावाट क्षमता की नई तापीय ऊर्जा परियोजना को मंजूरी दे दी है। 3×800 मेगावाट क्षमता वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 38,358 करोड़ रुपये होगी। प्रदेश सरकार और NTPC के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से स्थापित की जाने वाली यह परियोजना राज्य की बढ़ती बिजली जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।प्रदेश सरकार ने इसके साथ ही भविष्य की बढ़ती विद्युत मांग को ध्यान में रखते हुए 765/400 केवी, (4×1500 एमवीए) मीरजापुर पूलिंग उपकेंद्र (एआईएस) और संबंधित पारेषण लाइनों के निर्माण का प्रस्ताव भी तैयार किया है। इस परियोजना का उद्देश्य विभिन्न तापीय और पम्प्ड स्टोरेज परियोजनाओं से उत्पादित विद्युत की निर्बाध निकासी सुनिश्चित करना है, जिससे प्रदेश की विद्युत आपूर्ति व्यवस्था और अधिक मजबूत, भरोसेमंद और स्थायी बन सके।नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने इस निर्णय पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली पहुंचाना है।ऊर्जा मंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश में लगभग 4000 मेगावाट की नई तापीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी जा चुकी है, जिससे राज्य की तापीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी हो गई है। अब सरकार इसे तीन गुना करने के लक्ष्य पर कार्य कर रही है और नई 2400 मेगावाट परियोजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान प्रदेश सरकार ने एनटीपीसी के साथ इस परियोजना को लेकर समझौता किया था। अब मंत्रिपरिषद की मंजूरी मिलने के बाद यह परियोजना धरातल पर उतरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगी।मीरजापुर पूलिंग उपकेंद्र परियोजना के संबंध में ऊर्जा मंत्री ने बताया कि इसके माध्यम से अडानी मीरजापुर तापीय परियोजना, जेएसडब्ल्यू की पम्प्ड स्टोरेज परियोजना तथा अडानी सौर ऊर्जा परियोजना सहित अन्य ऊर्जा परियोजनाओं को मजबूत पारेषण नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। इस उपकेंद्र को साझा सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में विकसित किया जाएगा।करीब 2799.47 करोड़ रुपये की इस परियोजना में उपकेंद्र और ‘बे’ निर्माण पर 1315.91 करोड़ रुपये तथा पारेषण लाइनों के निर्माण पर 1483.56 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस परियोजना से प्रदेश में विद्युत आपूर्ति की गुणवत्ता, विश्वसनीयता और निरंतरता में उल्लेखनीय सुधार होगा।ऊर्जा मंत्री ए. के. शर्मा ने कहा कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से उद्योगों, किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को सस्ती, पर्याप्त और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में बड़ी सहायता मिलेगी। इसके साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के आधार पर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा क्षमता और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में भी देश के अग्रणी राज्यों में तेजी से उभर रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर घर, हर गांव और हर उद्योग तक गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि विकास की रफ्तार और तेज हो सके।

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