लखनऊ:मुस्लिम मजलिस के महासचिव इरफान खान कादरी ने कहा कि छात्रों के शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक आंदोलन के परिणाम स्वरूप केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा यह साबित करता है कि युवाओं की आवाज़ को हमेशा दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने सरकार से परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर प्रभावी रोक तथा युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों को भोजन और पानी उपलब्ध कराने वाले लोगों को निशाना बनाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। मोहम्मद जुनैद के गाज़ियाबाद स्थित आवास पर कथित पुलिस कार्रवाई तथा उनके परिजनों से पूछताछ की खबरें चिंताजनक हैं। यदि ये आरोप सही हैं तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। मानव सेवा को संदेह की दृष्टि से देखना न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
इरफान खान कादरी ने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रत्येक नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। असहमति का जवाब दमन नहीं बल्कि संवाद और न्याय होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि आंदोलन से जुड़े निर्दोष लोगों को परेशान करना बंद किया जाए तथा युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए सरकार ठोस और न्यायपूर्ण कदम उठाए।



