लखनऊ: इंकलाब हमेशा मौन को तोड़कर पैदा होता है, लखनऊ के ऐतिहासिक कर्बला अब्बास बाग की धरती पर यही इंकलाब देखने को मिला। धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद की अध्यक्षता में एक विशाल तहफ़्फ़ुज़-ए-औक़ाफ़ जलसा आयोजित हुआ,
जिसने न सिर्फ वक्फ की ज़मीनों पर नापाक कब्ज़े की साज़िशों को बेनकाब किया, बल्कि भूमाफियाओं के खिलाफ एक मज़बूत और निर्णायक आवाज़ बुलंद की।
कर्बला अब्बास बाग, जिसकी हर ईंट इतिहास और अकीदत की गवाह है, आज भ्रष्ट ताकतों के निशाने पर है। मौलाना कल्बे जवाद ने अपनी ओजस्वी तकरीर में इस खतरे को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट कहा, वक्फ की संपत्ति अल्लाह की अमानत है,
और हम हरगिज़ किसी नापाक कब्ज़े की कोशिश को कामयाब नहीं होने देंगे। उनका यह बयान महज़ एक चेतावनी नहीं, बल्कि वक्फ की ज़मीनों को लूटने वालों के लिए एक सीधा संदेश था।
जलसे में उपस्थित हज़ारों लोगों, धर्मगुरुओं और सियासी हस्तियों ने, जिनमें AIMIM प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली भी शामिल थे, अपने हाथों को उठाकर वक्फ की ज़मीनों की हिफ़ाज़त का अटल संकल्प लिया। यह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं था,
बल्कि अपनी विरासत और अपनी अमानत को बचाने का सामूहिक अहद था।मौलाना कल्बे जवाद ने मंच से प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि प्रशासन को मूक दर्शक बने रहने के बजाय भूमाफियाओं के खिलाफ सख्त से सख्त
कार्रवाई करनी चाहिए। यह सवाल सीधे तौर पर पूछा गया कि आखिर कौन सी ताकतें हैं जो इन लुटेरों को शह दे रही हैं और क्यों वक्फ की बेशकीमती ज़मीनों पर अवैध निर्माण बेखौफ जारी हैं?
इस अहम कार्यक्रम के दौरान, क्षेत्र में भारी पुलिस बल की तैनाती उस तनाव और संवेदनशीलता को दर्शाती थी जो वक्फ के इन मामलों में व्याप्त है। हालांकि, जलसे का शांतिपूर्ण और अनुशासित समापन समुदाय के इस संकल्प को दर्शाता है कि उनकी लड़ाई कानूनी और संवैधानिक दायरे में ही लड़ी जाएगी।
कर्बला अब्बास बाग का यह जलसा लखनऊ के इतिहास में एक मील का पत्थर बन गया है, एक ऐसा दिन जब अकीदत की ज़मीन से हक की आवाज़ उठी, और तहफ़्फ़ुज़-ए-औक़ाफ़ का नारा इंकलाब का पैगाम बन गया।



